खंडवा। जिले में जमीन की फर्जी रजिस्ट्री और नामांतरण का एक गंभीर मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के अकोला निवासी एक परिवार ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से शिकायत कर आरोप लगाया है कि उनके दिवंगत पिता की कृषि भूमि को हड़पने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया गया। शिकायत में मृतक के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी पहचान बनाने, दस्तावेज तैयार करने और उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री व नामांतरण कराने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने मामले में 14 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर निष्पक्ष आपराधिक जांच की मांग की है।
अकोला निवासी स्वाती उंबरकर, राहुल उंबरकर, अपर्णा सरोदे और अनुराधा उंबरकर ने संयुक्त रूप से एसपी को आवेदन दिया है। उन्होंने स्वयं को स्वर्गीय मधुसूदन उंबरकर के वैधानिक उत्तराधिकारी बताया है।
शिकायत के अनुसार, मधुसूदन उंबरकर ने 25 फरवरी 1991 को खंडवा तहसील के ग्राम मालीपुरा स्थित सिहाड़ा रोड पर खसरा नंबर 257 की करीब 0.60 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी थी। बाद में राजस्व रिकॉर्ड में बंटवारे के बाद खसरा नंबर 257/8 की 0.02 हेक्टेयर भूमि उनके नाम दर्ज रही।
परिवार के अनुसार, 27 फरवरी 2025 को पुणे में कैंसर के उपचार के दौरान मधुसूदन उंबरकर का निधन हो गया। इसके बाद परिवार ने अकोला की जूनियर सिविल कोर्ट से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त कर जमीन का नामांतरण कराने की प्रक्रिया शुरू की।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे राजस्व कार्यालय पहुंचे तो उन्हें जानकारी मिली कि संबंधित भूमि पहले ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज हो चुकी है। दस्तावेजों की जांच करने पर कथित रूप से सामने आया कि वर्ष 2023 में मृतक की जगह किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर उसकी पहचान मधुसूदन उंबरकर के रूप में कराई गई और इसी आधार पर विक्रय पत्र तैयार कर रजिस्ट्री करा दी गई।
परिवार ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से की गई, ताकि वास्तविक मालिक और उनके परिवार को इसकी जानकारी न मिल सके।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 26 सितंबर 2023 को तैयार किए गए विक्रय पत्र में पहचान संबंधी आवश्यक दस्तावेजों का उचित उल्लेख नहीं किया गया। विक्रेता और खरीदार के आधार कार्ड अथवा अन्य पहचान पत्रों का विवरण भी दस्तावेज में नहीं होने की बात कही गई है।
परिवार का आरोप है कि विक्रय राशि का भुगतान नकद दर्शाया गया, लेकिन उसके संबंध में कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। साथ ही रजिस्ट्री दस्तावेजों में आवश्यक नक्शा और राजस्व अभिलेख संलग्न नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कथित फर्जी रजिस्ट्री के बाद 4 दिसंबर 2023 को भूमि को फिर किसी अन्य व्यक्ति के नाम स्थानांतरित कर दिया गया। परिवार का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया पहले से तय साजिश का हिस्सा थी, जिसके जरिए मूल मालिक के परिवार के अधिकारों को समाप्त करने का प्रयास किया गया।
शिकायत में कुल 14 लोगों को इस कथित फर्जीवाड़े में शामिल बताया गया है। इनमें निजी व्यक्ति, सर्विस प्रोवाइडर, उप पंजीयक कार्यालय से जुड़े अधिकारी और राजस्व विभाग के कर्मचारी शामिल हैं।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि संबंधित लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, पहचान सत्यापन में लापरवाही बरतने और राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कराने में भूमिका निभाई।
शिकायत के अनुसार, स्वर्गीय मधुसूदन उंबरकर महाराष्ट्र के जल संसाधन विभाग में सब डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) के पद पर कार्यरत थे। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी अनुराधा उंबरकर और तीनों संतानें वैधानिक वारिस हैं।
परिवार का कहना है कि उनके पास उत्तराधिकार प्रमाण पत्र सहित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद उनकी संपत्ति पर फर्जी तरीके से कब्जा करने का प्रयास किया गया।
परिवार ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत आपराधिक जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए और जमीन के रिकॉर्ड की दोबारा जांच कराई जाए।
उन्होंने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इस तरह के फर्जीवाड़े से अन्य लोगों की संपत्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
