खंडवा। वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में सोमवार को सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले खंडवा में बड़ा प्रदर्शन किया गया। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग रैली के रूप में शहर पहुंचे और स्टेडियम ग्राउंड में सभा आयोजित कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने वनभूमि से बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं।
प्रदर्शन में शामिल समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि वे भिलाईखेड़ा के प्रभावित परिवारों के समर्थन में एकजुट होकर पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत पात्र परिवारों के दावों का निराकरण किए बिना प्रशासन बेदखली की कार्रवाई कर रहा है।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि सभी दावों का निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया के तहत समाधान होने तक किसी भी परिवार को वनभूमि से नहीं हटाया जाना चाहिए।
सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से जंगलों में निवास करता आया है और जल, जंगल व जमीन पर उनके पारंपरिक एवं वैधानिक अधिकार हैं। उन्होंने प्रशासन से वनाधिकार अधिनियम के प्रावधानों का पालन करते हुए आदिवासी परिवारों के अधिकारों का सम्मान करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने वनाधिकार अधिनियम की धारा 4(5), पेसा कानून और संविधान के अनुच्छेद 46 का हवाला देते हुए कहा कि पात्र आदिवासी परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना शासन की जिम्मेदारी है। बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बेदखली की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के लिए बैरिकेडिंग की। रैली और सभा के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
प्रदर्शन के दौरान “वनाधिकार अधिनियम का पालन करो”, “दावे का निराकरण किए बिना बेदखली नहीं चलेगी”, “आदिवासी अधिकारों पर हमला बंद करो” और “संविधान नहीं झुकेगा, आदिवासी अधिकार नहीं छिनेंगे” जैसे नारे लगाए गए।
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने प्रशासन से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
