अतिक्रमण हटने के दो साल बाद फिर लहलहाया 4200 एकड़ का वनक्षेत्र

अतिक्रमण हटने के दो साल बाद फिर लहलहाया 4200 एकड़ का वनक्षेत्र

अतिक्रमण हटने के दो साल बाद फिर लहलहाया 4200 एकड़ का वनक्षेत्र

खंडवा। गुड़ी रेंज के नाहरमाल और टाकलखेड़ा वनक्षेत्र से पर्यावरण संरक्षण की सुखद तस्वीर सामने आई है। करीब दो साल पहले जिन वनभूमियों पर अतिक्रमण कर खेती की जा रही थी, वहां वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब जंगल फिर से हरा-भरा नजर आने लगा है। लगभग 4200 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक हरियाली लौट आई है।

वन विभाग ने करीब दो वर्ष पहले अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाकर वनभूमि को कब्जे से मुक्त कराया था। इसके बाद खाली कराई गई जमीन पर जड़ें और बीज रोपे गए। समय के साथ बारिश और अनुकूल परिस्थितियों का साथ मिला तो क्षेत्र में वनस्पतियों का प्राकृतिक पुनर्जीवन शुरू हो गया।

अतिक्रमण हटने के बाद बदली तस्वीर

नाहरमाल और टाकलखेड़ा के जंगल में कभी अतिक्रमणकारी वनभूमि पर खेती कर रहे थे। इससे वनक्षेत्र और प्राकृतिक पर्यावरण पर असर पड़ रहा था। विभागीय कार्रवाई के बाद जमीन को दोबारा वन क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर ध्यान दिया गया।

अब बारिश के मौसम में यहां बड़ी मात्रा में हरियाली दिखाई दे रही है। कई हिस्सों में पौधे और घास तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिससे वन क्षेत्र का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल गया है।

प्राकृतिक पुनर्जीवन ने बढ़ाई उम्मीद

वन विभाग की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रकृति ने भी इस क्षेत्र को दोबारा संवारने में अहम भूमिका निभाई। जमीन में मौजूद बीज और जड़ों से नई वनस्पतियां विकसित हुईं। इससे वन क्षेत्र में हरियाली बढ़ने के साथ जैव विविधता को भी संरक्षण मिलने की उम्मीद है।

नाहरमाल और टाकलखेड़ा क्षेत्र में लौटी हरियाली यह बताती है कि वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर संरक्षण दिया जाए तो प्राकृतिक जंगल दोबारा विकसित हो सकते हैं। 4200 एकड़ में बदली यह तस्वीर वन संरक्षण के प्रयासों के लिए उत्साह बढ़ाने वाली मानी जा रही है।