भोपाल। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को जल्द कानूनी सहायता और ठगी की रकम को समय रहते फ्रीज कराने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने e-Zero FIR व्यवस्था का दायरा बढ़ा दिया है। अब प्रदेश में ₹25 हजार या उससे अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भी e-Zero FIR दर्ज की जा सकेगी। पहले यह सुविधा ₹1 लाख या उससे अधिक की ठगी के मामलों तक सीमित थी।
e-Zero FIR व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी की सूचना मिलते ही एफआईआर की प्रक्रिया शुरू करना, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और ठगी की रकम को अपराधियों के खाते से निकाले जाने से पहले होल्ड या फ्रीज कराना है।
मध्यप्रदेश पुलिस के अनुसार दिसंबर 2025 से अब तक खंडवा सहित प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों में 4,888 e-Zero FIR दर्ज की जा चुकी हैं। लगातार बढ़ते साइबर अपराधों के बीच इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए अब इसकी वित्तीय सीमा घटाकर ₹25 हजार कर दी गई है।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इस दौरान पीड़ित यदि तत्काल शिकायत करता है तो पुलिस, बैंक और वित्तीय संस्थाओं के समन्वय से ठगी की रकम को अपराधियों द्वारा निकालने से पहले फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है।
मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना देरी किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी के मामलों में समय सबसे महत्वपूर्ण है। घटना के तुरंत बाद शिकायत मिलने पर संबंधित एजेंसियों के बीच तेजी से समन्वय कर रकम को होल्ड कराने और पीड़ित को राशि वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
