खंडवा। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने शुक्रवार को खंडवा जिले के ग्राम जावर का दौरा कर उन्नत उद्यानिकी खेती का अवलोकन किया। उन्होंने प्रगतिशील किसान अश्विन बादल सिंह सावले के खेत पहुंचकर खीरे एवं टमाटर की फसल देखी और आधुनिक तकनीक से की जा रही खेती की सराहना की। इस दौरान अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख गौड़ा सहित कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान किसान अश्विन सावले ने बताया कि वे खीरे और टमाटर की खेती से एक एकड़ में सालाना करीब 4 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इसके बाद कलेक्टर श्री गुप्ता ने जावर में आयोजित कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेते हुए किसानों से परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जहां सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों से प्रति एकड़ लगभग 30 हजार रुपये की आय होती है, वहीं टमाटर और खीरे जैसी उद्यानिकी फसलों से किसान कई गुना अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने स्प्रिंकलर, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया।

प्रगतिशील किसान अश्विन सावले ने बताया कि उन्होंने चार वर्ष पहले दो एकड़ भूमि पर खीरा और टमाटर की खेती शुरू की थी। बेहतर लाभ मिलने के बाद उन्होंने अन्य किसानों को भी जोड़ा और एक कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का गठन किया। वर्तमान में इस एफपीओ से 160 किसान जुड़े हैं, जो लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उनके खेत में उत्पादित टमाटर, खीरा, करेला, लौकी और नींबू की आपूर्ति मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ, लुधियाना, नोएडा और पठानकोट सहित देश के विभिन्न बाजारों में की जाती है। वहीं मुंबई के व्यापारियों के माध्यम से टमाटर का निर्यात दुबई तक भी हो रहा है। एफपीओ से जुड़े किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है।
अश्विन सावले ने बताया कि उन्होंने अपने फार्म पर छह सोलर ड्रायर स्थापित किए हैं, जिनके माध्यम से करेला, मिर्च, टमाटर, नींबू और आम जैसी उपज को सुखाकर मूल्य संवर्धन किया जाता है। बाजार में टमाटर के दाम कम होने पर उसे सोलर ड्रायर से सुखाकर बेचा जाता है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और अधिक लाभ मिलता है।
कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने जावर के इस मॉडल को किसानों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक, संगठित प्रयास और उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
