खंडवा(डिजिटल डेस्क)। मेडिकल कॉलेज की एडमिशन कमेटी ने स्क्रूटनी के दौरान एक छात्रा का फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। भोपाल की रहने वाली छात्रा ने एमबीबीएस में एडमिशन लेने के लिए जो दिव्यांग सर्टिफिकेट लगाया, वह फर्जी निकाला। छात्रा ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक मेडिकल कॉलेज का प्रमाणित सर्टिफिकेट लगाया था। लेकिन शंका होने पर जांच की गई तो वह फर्जी पाया गया। कॉलेज ने छात्रा का एडमिशन निरस्त कर दिया, वहीं एफआईआर के लिए पुलिस से शिकायत की है।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान पकड़ाया फर्जीवाड़ा
नंदकुमारसिंह चौहान शासकीय मेडिकल कॉलेज खंडवा के डीन डॉ. संजय दादू ने बताया कि, कॉलेज में एमबीबीएस की 120 सीटें है, जिन पर एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान कमेटी ने प्रवेश पा चुके स्टूडेंट्स के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किया। इसी दौरान एक छात्रा के दिव्यांग कोटे से लिए एडमिशन संबंधी कागजों की जांच की तो दिव्यांग सर्टिफिकेट बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का पाया गया। शासन द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए चिन्हित कॉलेजों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय भी शामिल था।
एचओडी ने कहा- साइन मेरे नहीं
एडमिशन कमेटी ने दिव्यांग सर्टिफिकेट की जांच की तो वह दिखने में तो ओरिजनल था। लेकिन जब सर्टिफिकेट जारी करने वाले संबंधित मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से बात की तो खुलासा हुआ कि उन्होंने इस तरह का सर्टिफिकेट इश्यू नहीं किया है।
जिन एचओडी के हस्ताक्षर थे, उन्होंने भी पहले फोन पर और फिर लिखित में ईमेल कर सूचना भेजी कि यह सिग्नेचर उनके नहीं हैं। यह फर्जी तरीके से जारी किया गया सर्टिफिकेट है, जिसमें उनके कॉलेज का कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद स्टेट एडमिशन काउंसिल को इस बारे में अवगत कराया और आगे की कार्रवाई की।
छात्रा ने श्रवण बाधित होना बताया था, एडमिशन निरस्त
डीन डॉ. संजय दादू के अनुसार, भोपाल की रहने वाली छात्रा ने दिव्यांग सर्टिफिकेट में खुद को श्रवण बाधित होना बताया है। यानी उसे कानों से सुनाई नहीं देता है। इसी आधार का उसने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाया और दिव्यांग कोटे का लाभ लेते हुए एडमिशन लिया। जांच के बाद फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही छात्रा का एडमिशन निरस्त कर दिया और उसकी सीट वेटिंग में चल रहे अन्य छात्र को आवंटित कर दी। एडमिशन निरस्त होने की जानकारी छात्रा को दे दी गई है।
पुलिस से शिकायत की, 20 दिन से जांच चल रही
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जानकारी से जहां स्टेट मेडिकल कॉउंसिल को अवगत कराया है, वहीं इसकी शिकायत खंडवा पुलिस से की है। कॉलेज क्षेत्राधिकार के तहत आने वाले थाना मोघट रोड़ की पुलिस इस मामले में पिछले 20 दिन से जांच कर रही है। टीआई धीरेश धारवाल का कहना है कि, इस प्रकरण में उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया है। पुलिस अधीक्षक के पास प्रतिवेदन भेज दिया गया है। वहां से जैसे निर्देश मिलेंगे, आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नंबर, क्यू आर कोड स्कैन करने पर फर्जी नहीं लगा
खंडवा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के नोडल अधिकारी डॉ. पराग शर्मा ने बताया कि, कॉलेज में एडमिशन कमेटी बनी हुई है। जिसमें तमाम प्रकार की डेस्क होती है। हेल्प डेस्क, स्क्रूटनी डेस्क, स्क्रूटनी से जांच के बाद दस्तावेज एडमिशन कमेटी तक आते है। वहीं जो दिव्यांगता संबंधी सर्टिफिकेट आते है, उनकी जांच के लिए कुछ संस्थाएं नियत की गई है, जिन्हें नेशनल मेडिकल काउंसिल द्वारा मान्यता दी गई है।
इसी तरह से एक छात्रा का दिव्यांगता संबंधी सर्टिफिकेट बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का था। जिसे स्क्रूटनी डेस्क ने चेक किया, उसमें नंबर, क्यू आर कोड को स्कैन किया तो ऐसा नहीं लगा कि वो फर्जी है। लेकिन बाद में कुछ शंका होने पर हमने बीएचयू को मेल कर इस बारे में जानकारी मांगी। वहां से बीएचयू के ईएनटी डिपार्टमेंट का जवाब आया कि यह सर्टिफिकेट हमारे द्वारा जारी नहीं किया गया है। इसके बाद डीन साहब को अवगत कराया और उन्होंने आगे की कार्रवाई की।
प्रदेश में फर्जीवाड़े के मामले देख अलर्ट थी कमेटी
दरअसल, प्रदेश में पिछले दो माह से एमबीबीएस कोर्स के लिए सरकारी कॉलेज में फर्जी तरीके से एडमिशन लेने के मामले सामने आए हैं। आरोपी छात्रों द्वारा यूपी से फर्जी डिग्री सहित अन्य दस्तावेज बनवाने का खुलासा हुआ था। रीवा में दो छात्रों ने स्वतंत्रता सेनानी कोटे में फर्जी दस्तावेज से एडमिशन लिया था। जांच के दौरान दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर दोनों छात्रों पर केस दर्ज हुआ था। इसके बाद प्रदेश में लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद नंदकुमार सिंह मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी अलर्ट हो गया।
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