खंडवा। जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की वन विभाग की कार्रवाई के समर्थन में रविवार को आदिवासी कोरकू समाज ने बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। खंडवा और बुरहानपुर जिले से करीब पांच हजार समाजजन खंडवा पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रखने की मांग की।
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। कलेक्ट्रेट की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
कोरकू समाज के लोग पहले गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम में एकत्र हुए, जहां सभा आयोजित की गई। इसके बाद रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचकर समाज के प्रतिनिधियों ने सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान सीएसपी अभिनव बारंगे सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
ज्ञापन में कोरकू समाज ने कहा कि उनका अस्तित्व, संस्कृति, परंपराएं और आजीविका पूरी तरह जंगलों पर आधारित हैं। जलाऊ लकड़ी, महुआ, चिरौंजी, गोंद, तेंदूपत्ता, औषधीय वन उपज, पशुओं के चारे सहित अन्य लघु वनोपज हजारों आदिवासी परिवारों के जीवन-यापन का मुख्य आधार हैं।
समाज ने कहा कि लगातार हो रहे अवैध अतिक्रमण से जंगलों का क्षेत्रफल घट रहा है, वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है और आदिवासी समाज के पारंपरिक निस्तार अधिकारों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसलिए भिलाईखेड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान का समाज पूर्ण समर्थन करता है।

कोरकू समाज ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि खंडवा और बुरहानपुर जिले की वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रखी जाए। अतिक्रमण मुक्त कराई गई वन भूमि पर दोबारा कब्जा रोकने के लिए पौधारोपण, खाई, ट्रेंच, चौकी और वॉच टावर जैसी स्थायी सुरक्षा व्यवस्थाएं विकसित की जाएं। अभियान के दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा शासकीय कार्य में बाधा डालने और वन अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा महुआ, चिरौंजी, गोंद, तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज पर आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, वन सुरक्षा समितियों को अधिक सशक्त बनाने तथा वन संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों और ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने की भी मांग की गई।
करीब पांच हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। ज्ञापन सौंपने के बाद समाज के लोग शांतिपूर्वक वापस लौट गए। प्रशासन ने पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।

