खंडवा। गुरुपूर्णिमा उत्सव पर आयोजित होने वाले श्री दादाजी मेले को इस वर्ष स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में हिंदू उत्सव समिति ने महत्वपूर्ण पहल की है। समिति ने निर्णय लिया है कि मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को परोसे जाने वाले सभी भंडारे पूरी तरह इको-फ्रेंडली होंगे और उनमें प्लास्टिक व थर्माकोल के डिस्पोजल का उपयोग नहीं किया जाएगा।
शनिवार को भवानी माता मंदिर स्थित गणेश गौशाला में हिंदू उत्सव समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 40 विभिन्न समाजों के अध्यक्ष, सचिव एवं भंडारा समितियों के आयोजकों ने भाग लेकर इस वर्ष श्री दादाजी मेले को पूर्णतः प्लास्टिक मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
समिति अध्यक्ष मोहन काशीव, रामचंद्र मौर्य और अखिलेश गुप्ता ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य मेले में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाले प्लास्टिक और थर्माकोल के डिस्पोजल पर रोक लगाना था। सभी समाजों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि श्रद्धालुओं की सेवा में अब केवल पर्यावरण हितैषी सामग्री का ही उपयोग किया जाएगा।
निर्णय के अनुसार, भंडारों में कागज की प्लेटें, कागज के दोने, पलाश (खाखरे) के पत्तों से बनी पारंपरिक पत्तलें तथा केले के पत्तों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही भंडारा आयोजकों और श्रद्धालुओं को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा।
बैठक में मुख्य वक्ता डॉ. शक्तिसिंह राठौर ने कहा कि दादाजी की नगरी को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक न केवल पर्यावरण और भूमि को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि मूक पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। उन्होंने सभी आयोजकों से अपील की कि वे प्लास्टिक के स्थान पर कागज और प्राकृतिक पत्तों से बने पारंपरिक बर्तनों का ही उपयोग करें।
बैठक में धर्मेंद्र बजाज, गिरीश बजाज, मोहन पटेल, महेश पांचाल, दिनेश चौकसे, विनायक राव दराडे, रमेश तांदले, विमल खंडेलवाल, भावेश बिल्लौरे, महेश जायसवाल सहित 40 समाजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विंटी राजपाल ने किया, जबकि आभार जीवन डिंडोरे ने व्यक्त किया।
