ओंकारेश्वर: ममलेश्वर मंदिर के शिखर क्षेत्र वाले मंदिरों के पट खुले: गंगा आरती की तर्ज पर नर्मदा आरती की

ओंकारेश्वर: ममलेश्वर मंदिर के शिखर क्षेत्र वाले मंदिरों के पट खुले: गंगा आरती की तर्ज पर नर्मदा आरती की

ओंकारेश्वर: ममलेश्वर मंदिर के शिखर क्षेत्र वाले मंदिरों के पट खुले: गंगा आरती की तर्ज पर नर्मदा आरती की

खंडवा(नंदनी पाल)। ओंकारेश्वर में ममलेश्वर मंदिर के शिखर क्षेत्र में स्थित अन्य शिव मंदिरों को खोलकर उनकी साफ-सफाई कराई गई। आज सोमवार से इन मंदिरों में पूजा शुरू कराई गई है। यह शिव मंदिर सालों से बंद पड़े हुए थे। पुरातत्व विभाग की ओर से इन पर ताले लटके हुए थे। खंडवा कलेक्टर ने इन मंदिरों को खुलवाया और उनकी साफ-सफाई कराई। अब इन मंदिरों में भी नियमित रूप से पूजा होगी।

पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ममलेश्वर मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। मंदिर परिसर में स्थित अन्य मंदिरों में भी पूजा अर्चना शुरू की जाएगी, यात्रियों की सुविधा के लिए यात्री प्रतीक्षालय के रूप में नया टीन शेड बनाकर यात्रियों के बैठने और सीलिंग फैन लगाने आदि की व्यवस्था की जा रही है।

एसडीएम वर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में मंदिर परिसर में लगाए गए बेरिकेड हटाकर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को और सुलभ बनाने की कार्रवाई की जा रही है।

नर्मदा आरती को भव्य रूप दिया जा रहा

ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर स्थित कोटितीर्थ घाट पर मां नर्मदा की आरती अब नियमित रूप से की जा रही है। सहायक कलेक्टर व सीएमओ डॉ. श्रीकृष्णा सुशीर ने बताया कि इस साल सावन महीने के पहले सोमवार से नर्मदा आरती पुनः अपने भव्य रूप में शुरू की गई है। वैदिक आचार्यजन विधि-विधान से भव्यता के साथ मां नर्मदा का पूजन, अभिषेक एवं महाआरती करते हैं।

देश दुनिया से यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों ने हरिद्वार और ऋषिकेश की तरह ओंकारेश्वर नगरी में मां नर्मदा के तट पर होने वाली महाआरती की सराहना की है। यह आरती ओंकारेश्वर में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम बन गई है, जो स्थानीय लोगों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करती है। इसे ओर भव्य रूप दिया जा रहा है।