खंडवा। ग्राम सारोला के किसान भागीरथ पिता रामचंद की मृत्यु के मामले में एसडीएम पंधाना और उप संचालक कृषि विभाग द्वारा कराई गई जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। प्रशासन के अनुसार, जांच में खेत में जलभराव और खाद नहीं मिलने के कारण बुआई प्रभावित होने के दावे की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मृतक भागीरथ के नाम 1.11 हेक्टेयर और उनकी पत्नी रामकली के नाम 1.19 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। इसमें से करीब ढाई एकड़ में मक्का की फसल बोई गई थी, जबकि शेष भूमि पड़त थी। रिपोर्ट में बताया गया कि अधिकांश भूमि पर पानी भरने जैसी स्थिति नहीं थी। कुछ हिस्सों में खेत तैयार करने में देरी के कारण समय पर बुआई नहीं हो सकी।
जांच के दौरान खेत के मेढ़ पड़ोसियों और ग्राम कोटवार से भी जानकारी ली गई। उनके अनुसार, इस बार मृतक के पुत्र हौसीलाल द्वारा खेत के कुछ हिस्से में बुआई कर मक्का लगाया गया था। कोटवार ने बताया कि पूर्व में भी भागीरथ कुछ जमीन अन्य ग्रामीणों को बटाई पर देता था।
प्रशासन की जांच में परिवारिक विवाद की बात भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व में भागीरथ ने अपने बच्चों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए बोरगांव बुजुर्ग चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले में तहसीलदार एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी पंधाना न्यायालय में धारा 107, 116(3) सीआरपीसी के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए प्रकरण दर्ज किया गया था।
कृषि विभाग के अनुसार, किसान भागीरथ ने खाद नहीं मिलने को लेकर विभाग में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। उप संचालक कृषि नितेश यादव ने बताया कि जिले में 1 अप्रैल से 9 जुलाई 2026 तक किसानों को कुल 42 हजार मीट्रिक टन खाद का वितरण किया गया है, जिसमें यूरिया, डीएपी और एनपीके शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान ई-विकास प्रणाली के तहत किसान जिले के निजी विक्रेताओं, विपणन संघ और संबंधित विकासखंड से जुड़े अन्य जिलों के विक्रेताओं से भी खाद प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशासन ने जांच के आधार पर कहा है कि मृतक के पुत्र हौसीलाल द्वारा मीडिया में दिए गए जलभराव और खाद नहीं मिलने से आत्महत्या के कारणों के दावे जांच में प्रमाणित नहीं पाए गए हैं। वहीं, घटना को लेकर पुलिस की अलग से जांच जारी है।
