खंडवा। संत शिरोमणि रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन-दर्शन, समता, भक्ति, सेवा, सामाजिक न्याय एवं मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेशभर में समरसता संकल्प अभियान एवं यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को भोपाल से रवाना हुई पावन कलश रथयात्रा गुरुवार को खंडवा जिला मुख्यालय पहुंची।
संत रविदास के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास का संदेश समाज में व्याप्त विषमता को समाप्त कर समरसता और भ्रातृभाव स्थापित करने का है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि संत रविदास के कालजयी विचारों को भावी पीढ़ी तक पहुंचाया जाए, ताकि समाज में समानता और भाईचारे की भावना और मजबूत हो।

‘सबका साथ, सबका विकास’ संत रविदास के विचारों की प्रतिध्वनि
विधायक कंचन तन्वे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मूलमंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास’ संत रविदास के विचारों की ही प्रतिध्वनि है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा में लाना और उसे सम्मान के साथ आगे बढ़ाना ही संत रविदास के संकल्पों की वास्तविक सिद्धि है।
पंधाना विधायक छाया मोरे ने संत रविदास की शिक्षाओं को आत्मसात करने को गौरव का विषय बताया। महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने सागर में 102 करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास के मंदिर एवं स्मारक के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया।
जिला पंचायत परिसर में हुआ भव्य स्वागत
खंडवा के जिला पंचायत कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने पावन कलश रथयात्रा का स्वागत किया। इस अवसर पर खंडवा विधायक कंचन मुकेश तन्वे, पंधाना विधायक छाया मोरे, खंडवा महापौर अमृता अमर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी सुदेश वानखेडे, जिला भाजपा अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर सहित यात्रा संयोजक सूरजपाल सिंह सोलंकी, सह संयोजक सुधांशु जैन, भरत पटेल, आनंद चौहान एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

10 सितंबर तक जिले के गांवों में पहुंचेगी यात्रा
जिला भाजपा अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर ने कहा कि सभी को संत रविदास के बताए मार्ग पर चलने और सामाजिक समरसता के ताने-बाने को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए।
यह पावन कलश रथयात्रा 20 अगस्त से 10 सितंबर तक खंडवा जिले के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण करेगी। इस दौरान सामूहिक आरती, गुरुवाणी पाठ, भजन संध्या, समरसता संकल्प सहित विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों में स्थानीय संतों, गुरुओं, समाज के प्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी।
