खंडवा। जिला जेल खंडवा में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके पुनर्वास की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को स्वरोजगार से जुड़े प्रशिक्षण देने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
जेल अधीक्षक डी.के. सारस ने बताया कि इसी उद्देश्य से जन शिक्षण संस्थान खंडवा द्वारा बंदियों के एक समूह को पेंटिंग और गोंड आर्ट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को हुनर विकसित करने और जेल से बाहर निकलने के बाद स्वरोजगार से जुड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है।
बंदियों की जीवनशैली, सोच-विचार, रहन-सहन, खान-पान, बातचीत के तरीके और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नियमित आध्यात्मिक कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। ब्रह्माकुमारी बहनों और भाइयों द्वारा प्रतिदिन सुबह 7:30 से 8 बजे तक आध्यात्मिक ज्ञान दिया जाता है।
इसके अलावा बंदियों को स्वस्थ रहने और मेहनत के प्रति प्रेरित करने के लिए योग, पीटी, आध्यात्मिक भजन-कीर्तन और सामुदायिक प्रार्थना जैसी गतिविधियां कराई जा रही हैं। जेल प्रशासन का उद्देश्य बंदियों को अनुशासन में रहते हुए जेल जीवन को सकारात्मक रूप से बिताने के लिए प्रेरित करना है।
जेल में निरक्षर बंदियों को साक्षर बनाने के लिए साक्षरता कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। इसके माध्यम से बंदियों को पढ़ना-लिखना सिखाने का प्रयास किया जा रहा है।
जेल प्रशासन के अनुसार, स्वरोजगार प्रशिक्षण, शिक्षा, योग और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करने की दिशा में कार्य जारी है।
