खंडवा(नंदिनी पाल)। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने शनिवार रात राज्य सेवा परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट जारी किया। इसमें खंडवा के दो युवाओं को सफलता मिली हैं। एक किसान की बेटी और दूसरा अपर कलेक्टर के ड्राइवर का अफसर बेटा हैं। दोनों का चयन जनपद पंचायत सीईओ के पद पर हुआ है।
जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर अमलपुरा गांव से पहली बार किसी बेटी को सरकारी सेवा में स्थान मिला है। मध्यमवर्गीय किसान शंकरसिंह चौहान की बेटी राजेश्वरी चौहान का सिलेक्शन जनपद पंचायत सीईओ के पद पर हुआ हैं। परिवार में तीन भाई-बहनों में राजेश्वरी सबसे बड़ी हैं। बारहवीं तक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ी राजेश्वरी ने इंदौर के कॉलेज से एमए पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया हैं। वहीं रहकर वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी।
दैनिक भास्कर ने राजेश्वरी से उनकी सफलता के बारे में बात की, पढ़िए पूरी बातचीत…
जनपद सीईओ के पद पर सिलेक्ट हुई राजेश्वरी चौहान ने बताया यह मेरा दूसरा अटैंप्ट था, जिसमें मैं इंटरव्यू तक पहुंची और सिलेक्ट हुई। पहले अटैंप्ट में मैं मैन्स क्लियर नहीं कर पाई थी।
राजेश्वरी ने कहा-

गांव और किसान परिवार का बैकग्राउंड होने से बड़े शहर में जाकर सरकारी नौकरी की तैयारी के दौरान समस्याएं आती है। लेकिन परिवार का सहयोग हो तो सारी मुश्किलें आसान हो जाती हैं। मुझे परिवार का पूरा सपोर्ट मिला।
राजेश्वरी ने इंटरव्यू में भजन गाकर सुनाया
राजेश्वरी ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान बोर्ड चेयरमेन और मेंबर्स ने कहा कि आपका नाम तो धार्मिकता से जुड़ा है। हिंदू धर्म में राजेश्वरी देवी की पूजा होती है, उनके बारे में आप क्या जानती हैं। इस पर मैंने कहा कि मुझे ज्यादा जानकारी तो नहीं है।
इसके बाद उन्होंने कहा कि खंडवा में ओंकारेश्वर ज्योतिलिंग है, बारह ज्योर्तिलिंगो का एक श्लोक है, वह सुनाकर बताओ। राजेश्वरी बताती है कि मुझे उस श्लोक की कुछ लाइनें पता थी, मैंने बता दिया। फिर इंटरव्यूअर ने पूछा कि आपकी पंसद क्या है? जिसके जवाब में मैंने गायन कहा। इंटरव्यू बोर्ड ने कहा कि कोई भजन गाकर बताओ, मैंने उन्हें भजन सुनाया।

इंटरव्यू में पूछा- गांव में कैसी समस्याएं, किसी अफसर को देखा है
राजेश्वरी बताती है कि इंटरव्यू बोर्ड ने ग्रामीण माहौल और वहां की समस्याओं के बारे में भी सवाल पूछे। मैंने बताया कि गांव में अच्छी सड़कें और नालियां नहीं है, खेत तक जाने के लिए रास्ता नहीं है। आठवीं तक स्कूल है, हाईस्कूल के लिए जिस गांव (भामगढ़) जाते है, वहां रास्ते में नदी है, उस पर पुलिया नहीं हैं। ऐसे में कई बेटियों की पढ़ाई छूट गई है, इसका असर बालिका शिक्षा पर भी हुआ है। गांव में साक्षरता की कमी है।
इसके बाद इंटरव्यू बोर्ड ने पूछा कि किसी बड़े अफसर को गांव में निरीक्षण करते हुए देखा है। राजेश्वरी बोली- मैंने तो आज तक किसी अफसर को नहीं देखा।
जिसका जवाब नहीं पता, सॉरी बोलकर आगे बढ़ती गई
राजेश्वरी ने बताया कि मुझसे इंटरव्यू में जो पूछा गया, मैंने वहीं बताया। मैंने कोई भी बनावटी जवाब नहीं दिए। जिस सवाल का जवाब मुझे नहीं पता, वहां मैं सॉरी बोलकर आगे बढ़ती गई। मैंने यहीं कहा कि मैं अफसर बनकर ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत विकास पर जोर दूंगी। मेरा सिलेक्शन जनपद सीईओ के लिए हुआ है तो मेरा फोकस ग्राम पंचायतों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने पर रहेगा।
सोशल मीडिया से दूर रहती है राजेश्वरी
राजेश्वरी ने बताया कि, स्कूल से लेकर कॉलेज और अब प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी तक उन्होंने मोबाइल का उपयोग सिर्फ इंटरनेट नॉलेज के लिए किया है। बाकी वो सोशल मीडिया से दूर रहती है। वो वॉट्सऐप तक नहीं चलाती है। जो कोचिंग और अपने स्तर पर पढ़ाई करती थी, उनके नोट्स बनाती थी। इधर उससे छोटी बहन मुस्कान चौहान ने बीएससी एग्रीकल्चर किया है। भाई ऋषिराज चौहान बारहवीं में है, जो कि पीएटी की तैयारी कर रहा हैं।
एडीएम के ड्राइवर का बेटा बना सीईओ
राजेश्वरी चौहान के अलावा खंडवा के ऋतिक सोलंकी को भी पीएससी में सफलता मिली है। वे दूसरी बार पीएससी में चयनित हुए है, इस बार उनका चयन जनपद पंचायत सीईओ के पद पर हुआ है। ऋतिक साेलंकी वर्तमान में आलीराजपुर में ATO यानी सहायक पेंशन अधिकारी के पद पर है। उनके पिता रूपसिंह सोलंकी खंडवा में अपर कलेक्टर के ड्राइवर हैं।
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